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Toggleहिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई के घेरो से बाहर निकलो। धर्म हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई धर्म नहीं घेरे है। धर्म को
एक व्यक्ति पूछता है परमात्मा ये बताओ वास्तव में धर्म कौन सा उत्तम है ? यह धर्म कहते किसे हैं
तुम ध्यान से देखना जब एक बच्चा पैदा होता है तो तुम सभी उसे अपने अपने तथाकथित धर्म के अनुसार
परमात्मा को उतार कर धरती पर लाओ अगर तुम्हें सुखी होना है, आनंदित होना है, मस्त होना है तो यह
परमात्मा तुम किन शास्त्रों में से पढ़कर बोल रहे हो. मैं किसी भी शास्त्र का उपयोग नहीं करता हूं. और
ना मंदिर जगाओ…ना मस्जिद जगाओ…जागना है तो तुम स्वंय जागो (Wake up Yourself). धर्म क्या है. अध्यात्म क्या है. केवल
भारत धर्म गुरू है. विश्व गुरू (Vishwa Guru) है फिर भी यहां अशांति क्यों है. भारत में उपद्रव और हिंसा
बार-बार तुम्हारे प्रश्न…एक ही बात को तुम कई बार पूछते हो. मुक्ति कैसे संभव है. मोक्ष कैसे संभव है. मुक्ति
चीन में महिलाओ को लोहे का जूता पहनते थे ‘‘लोहे का जूता‘‘ या ‘‘पैरों को बांधना‘‘ एक ऐतिहासिक प्रथा थी,
यदि आप गूगल सर्च में केवल सावन लिखोगे तो आपको सावन में शिव की पूजा...सावन सोमवारी (sawan somwar) कब है
जब से तुमने धर्म को स्कूल में पढ़ाना चालू कर दिया है तब से धर्म की खोज ही समाप्त हो
कभी तुमने चांदनी रात में झील देखी (What is Bhed Buddhi)है. तरंग उठती है तो क्या होता है ? तरंग
परमात्मा के दर्शन कभी नहीं होते परमात्मा के दर्शन कभी नहीं होते क्योंकि उसके दर्शन होने का तो तात्पर्य होता
धर्म वस्त्र नहीं आत्मा बदलने का नाम है ईश्वर कण-कण में है, सावन में शिव की पूजा करने से पहले
एक ने प्रश्न किया कि क्या आप एक और धर्म की दुकान (Dhram ki Dukan) खोलने का प्रयास कर रहे
तुम्हारा दृष्टिकोण क्या है यह इस बात से दिख जाता है कि तुम किसके प्रति आकर्षित होते हो ‘तुम किसमे
जीवन का सच्चा अर्थ क्या बन जाता है, पाखंड? - पाखंड (Pakhand) वह है जिसका स्वयं का अनुभव नहीं हुआ
अज्ञान तो मारता है ज्ञान ज्यादा मारता हैं ! परमात्मा ने इतनी सुन्दर सृष्टि बनाई, नदिया बनाई, पेड़ पौधे बनाये,
धर्म जंगलो में भागने से नहीं मिलता तुम्हारा महात्मा तुम्हे हमेशा से ही गुमराह करता आया है तुमने देखा आज
Sawan Somwar 2022: अभी सावन का महीना चल रहा है और सभी शिव की भक्ति में लीन हैं. जानते हो
“धर्म प्राप्ति के उपाए” आज संसार मे जितने उपद्रव तुम धर्म कि नाम पर कर रहे हो उतने शायद ही