एक ही सवाल…बार-बार भिन्न-भिन्न धर्मों के लोग आकर पूछते हैं (What is Dhram). परमात्मा समाज में हिंसा क्यों बढ़ रही
एक व्यक्ति पूछता है कि परमात्मा तुम क्या सिखाने का प्रयास करते हो. तुम क्या समझाना चाह रहे हो या
एक ने पूछा कहता है परमात्मा मुक्ति क्या है ? क्या तुम जो कहते हो कि सारे धर्मों को छोड़
आजा लोट के आजा मेरे मीत तुझे मेरे गीत बुलाते है।”लौटना कभी आसान नहीं होता।”एक मशहूर कहानी आपने पहले भी
What is god: फिर किसी ने पूछा कहा परमात्मा तुम्हारा मार्ग कौन सा है ? पंथ कौन सा है.. कौन
एक ने प्रश्न किया कि तुम कहते हो कि धर्म नहीं होता तो दुनिया सुंदर होती. सभी धर्मां के शास्त्र
इसकी आवश्यकता क्यों पड़ी ? क्योकि तुम्हारे तथाकथित धर्म या सम्प्रदाय में कुछ तो कमी है की जिसके कारण पूरी
बार-बार तुम्हारे प्रश्न…एक ही बात को तुम कई बार पूछते हो. मुक्ति कैसे संभव है. मोक्ष कैसे संभव है. मुक्ति
धर्म जंगलो में भागने से नहीं मिलता तुम्हारा महात्मा तुम्हे हमेशा से ही गुमराह करता आया है तुमने देखा आज
एक ने पूछा कि क्या धार्मिक होना या अध्यात्मिक (धार्मिक और आध्यात्मिक) होना आवश्यक है. हम क्यों हिंदू हों या
एक ने पूछा कि परमात्मा तुम किन शास्त्रों में से पढ़कर बोल रहे हो. मैं किसी तुम्हारे शास्त्र से नहीं
“धर्म या अहंकार” “आओ अब तो धर्म कोई ऐसा बनाया जाये। जिसमे इंसान को इंसान बनाया जाये !!” सारी दुनिया
कभी तुमने चांदनी रात में झील देखी (What is Bhed Buddhi)है. तरंग उठती है तो क्या होता है ? तरंग
“धर्म प्राप्ति के उपाए” आज संसार मे जितने उपद्रव तुम धर्म कि नाम पर कर रहे हो उतने शायद ही
किसी ने पूछा परमात्मा संसार में दुख क्यों है ? कोई हिंदू है, कोई मुसलमान, कोई सिख, कोई ईसाई लेकिन
जीवन लाखों लोगों में से एक को प्राप्त होता है. ये कोई आसमान से नहीं टपकता बल्कि धक्के खाकर मिलता
चीन में महिलाओ को लोहे का जूता पहनते थे ‘‘लोहे का जूता‘‘ या ‘‘पैरों को बांधना‘‘ एक ऐतिहासिक प्रथा थी,
यंहा अनाड़ी ही धर्म ध्वजा सँभालने का दावा करते है। इससे ज्यादा क्या नीचे गिरोगे तुम जंहा तुम्हे जागा हुआ
एक ने पंक्ति भेजी और कहा कि परमात्मा व्याख्या करो…इस पंक्ति की…ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है.
मुख्य प्रश्न ? यह प्रश्न आमतौर पर उन विचारों और कथाओं से जुड़ा होता है, जो कुछ विशेष संस्कृतियों या
तुम प्रश्न पूछते हो? कि धार्मिक कैसे बनेंगे? बनने की कोशिश भी करते हो लेकिन बनते नहीं! क्योंकि तुमने धर्म