एक महात्मा आया बोला कि परमात्मा का दर्शन क्यों नहीं हो रहा है उस विराट का अनुभव क्यों नहीं हो
जीवन का सच्चा अर्थ क्या बन जाता है, पाखंड? - पाखंड (Pakhand) वह है जिसका स्वयं का अनुभव नहीं हुआ
एक ही सवाल…बार-बार भिन्न-भिन्न धर्मों के लोग आकर पूछते हैं (What is Dhram). परमात्मा समाज में हिंसा क्यों बढ़ रही
इसकी आवश्यकता क्यों पड़ी ? क्योकि तुम्हारे तथाकथित धर्म या सम्प्रदाय में कुछ तो कमी है की जिसके कारण पूरी
बार-बार तुम्हारे प्रश्न…एक ही बात को तुम कई बार पूछते हो. मुक्ति कैसे संभव है. मोक्ष कैसे संभव है. मुक्ति
एक ने पूछा कहता है परमात्मा मुक्ति क्या है ? क्या तुम जो कहते हो कि सारे धर्मों को छोड़
एक व्यक्ति आया और वह पूछता है कि परमात्मा मैं कौन सी सिद्धी करूं जिसमें सिद्ध (Bageshwar Dham) हो जाऊं…जिससे
परमात्मा को उतार कर धरती पर लाओ अगर तुम्हें सुखी होना है, आनंदित होना है, मस्त होना है तो यह
सत्य क्या है? हम बात कर रहे है सत्य धर्म की । सत्य धर्म जिसे बुद्ध ने पाया, महावीर ने
बागेश्वर धाम वाले के (Bageshwar Dham Baba)यहां सारे साधु संत जा रहे हैं. चाहे कोईं राजेंद्र दास हो या रमादास…किसी
अज्ञान तो मारता है ज्ञान ज्यादा मारता हैं ! परमात्मा ने इतनी सुन्दर सृष्टि बनाई, नदिया बनाई, पेड़ पौधे बनाये,
एक व्यक्ति पूछता है परमात्मा ये बताओ वास्तव में धर्म कौन सा उत्तम है ? यह धर्म कहते किसे हैं
एक ने पूछा कि क्या धार्मिक होना या अध्यात्मिक (धार्मिक और आध्यात्मिक) होना आवश्यक है. हम क्यों हिंदू हों या
मुक्ति क्या है बंधन क्या है? तुम जिस मुक्ति की बात करते हो उसे खोजने से पहले ये देखो की
तुम ध्यान से देखना जब एक बच्चा पैदा होता है तो तुम सभी उसे अपने अपने तथाकथित धर्म के अनुसार
What is god: फिर किसी ने पूछा कहा परमात्मा तुम्हारा मार्ग कौन सा है ? पंथ कौन सा है.. कौन
Sawan Somwar 2022: अभी सावन का महीना चल रहा है और सभी शिव की भक्ति में लीन हैं. जानते हो
एक ने पूछा कहता है परमात्मा प्रज्ञा जागृत होने पर जो रुपांतरण (Meaning of Rupantaran)होता है. बुधत्व के घटने पर
हम सब दौड़ रहे हैं परंतु क्यों? नहीं पता। और लौटता भी कौन है? और इस दौड़ का केवल रूपए
तुम्हारा दृष्टिकोण क्या है यह इस बात से दिख जाता है कि तुम किसके प्रति आकर्षित होते हो ‘तुम किसमे
तुम यहाँ क्यों आये हो जीवन क्या है? तुम लोग समझते हो हम लोग पैदा हुए मर जायँगे। बस यही