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Jagateraho

DISCLAIMER

This website is meant for only selected target audience. We strive to create awareness among all the naïve people around who are in trap of those Tantric and so-called Saints. Our aim is to target those trapped blind religious followers who have been badly misguided by the Mandir Pujaris, Yog Guru, Sadhus and Sanyasis for the sake of money. We just want people around to come out of superstitions and lead a real and decent life.

Any resemblance or name of any person, organization, caste or religion used here are sheer contribution to us, we don’t aim to hurt or disrespect any god, religion, caste or any saint who are or had been working towards the spirituality with utmost honesty. It is because of their honest contribution, the faith and belief in spirituality are intact and alive. It is because of them, there is god fear in people’s mind. Not only this, it is because of the belief of these knowledgeable Saints; our general public are leading towards the right path with an absolute correct spirituality.

We strive to rescue our innocent people from all the deceit and foxiness present in the community. The Tantrics and Aghooris have a clear intention to make money by taking the naïve people towards hell by educating them about Tantric Vidya, Black Magic and other negative energy. All this ultimately ruins every individual’s life and then there is no come back. We aim to bring back all these lost people to the real world and help them be a part of the society of decent and honest people.

Despite of all this, if anyone still feel that we are hurting anyone’s belief, sentiments or disrespecting any religion then we whole heartedly seek an apology.
We wish for peace& harmony in the entire world, we desire to see people living in peace, love and brotherhood. Along with this we don’t want anyone to have hatred or disbelief for any religion, place or caste because of any particular ideology or teaching. Indeed we request everyone to recognize those frauds that are spreading such false ideology and understand their intention of stooping down the other religion.

If anyone ever see anyone around, who is trying to baffle people with black magic, tantric vidya, or any negative energy, then please contact us through our websitehttp://jagteraho.co.in. Please write us about any such foxiness or incident happening around.We whole-heartedly welcome all the people, who want to join us for this holy work. We will together wipe out the superstition from around us and make this place a better place to live in with peace, love and brotherhood. We will together educate people about the right culture, religion and spiritual knowledge. We need to eradicate all such Sadhu, Yogi, Tantric and Aghooris because life and death is in god’s hand and not them.

Let the truth prevail over emotions.

Any dispute will subject to Delhi Jurisdiction.

मैं क्या समझा रहा हूँ मेरे को सुन कर तुम्हे क्या लाभ होगा। किस व्यक्ति को मुझे सुन कर लाभ होगा। पहले ये समझ लो तभी तुम कुछ समझ पाओगे।
जिनकी आंखे अभी तक बंद है जो केवल इसी बात पर विश्वास करते है की गुरु जी उन्हें बैकुण्ठ में बिठा देंगे ए उनका काम धन्दा चलाने में कोई उपाए कर देंगे ए उन्हें तंत्र . मन्त्र के द्वारा किसी और ही दुनिया में पंहुचा देंगे ए गुरु जी कोई तंत्र . मन्त्र दे देंगे जिससे उनका तीसरा चक्षु खुल जाएगा और उन्हें भूत भविष्य नजर आने लग जायेगा ए उन्हें अदृश्य शक्तिया दिखने लग जाएँगी ऐसे व्यक्ति मेरे लेक्चर मत सुने।
जिन्हे अभी तक यही भ्रम है कि हवन करके ही उनके सारे कार्य सिद्ध हो जायेंगे। मन्त्र जाप से या यंत्र पूजा से उन्हें अपार संपत्ति मिल जाएगी। उन्हें मेरा एक भी लेक्चर नहीं सुनना चाहिए। क्योकि मेरे लेक्चर सुनने मात्र से उनके सारे भ्रम टूट जायेंगे और किसी के स्वपन तोड़ने से वो नाराज ही तो होता है। इसलिए मैं फिर विनती करता हूँ कि ऐसे व्यक्ति मेरे लेक्चर मत सुने।
मेरे लेक्चर तो केवल वही सुने जो सत्य को सुनने की ए समझने की तथा जानने की हिम्मत रखते है। जो मानते है की मनुष्य आँख खोले तो विराट को देख ले और आँख बंद करे तो स्वयं से भी दूर हो जाये।
लेकिन जिन्हे अभी तक समोसे खाकर तथा चाय पीकर ही अपने कैंसर तथा लकवा दूर करने के भ्रम पर विश्वास है जिन्हे अभी तक यही भ्रम है कि उनके परम गुरु जी नदी के पानी को कढ़ाई में डालकर पूड़िया तल लेते थे वो पानी में तली हुई पूड़िया ही खाते रहे ए उसी में भरमाते रहे ए जिन्हे अभी तक यही भ्रम है कि पूरी. पूरी रात यंत्रो तंत्रो की आरती उतारने से हवन में घी डालने से ही उनको धन की प्राप्ति हो जाएगी वो अपने संसार को हवन में घी डालकर ही चलाते रहे। ऐसे व्यक्ति मेरे लेक्चर मत सुने।
जो अभी तक इसी बात पर ही विशवास किये हुए है कि शमशान जाकर 2 . 4 भूत . प्रेत सिद्ध करके दूसरे को भरमा कर उसका धन खिसकाया जा सकता है वो वही करते रहे उन्हें मेरे लेक्चर नहीं सुनने चाहिए। वो वही करते रहे क्योकि ये सम्भव ही है क्योकि मैं भी मानता हूँ कि इस प्रकार सम्मोहित कर रुपया खिसकाया जा सकता है ये सत्य है क्योकि ये मेरा निज अनुभव है ये मेरे साथ भी हुआ है।
मैं भी एक ऐसे व्यक्ति को जानता था जिसका नाम दिनेश आनंद था जो एक छोटी सी नौकरी करता था बाद में उसने उसके किसी राजस्थान के गुरु से जो की एक तांत्रिक था उसी से भूत प्रेत को सिद्ध करने की विधि सीख ली तथा उसने 2 चेले बना लिए जिनका नाम बीरेंद्र और जैन था उन्ही का सहारा लेकर वो धनपतियों से मिलता और उनके मन में तंत्र मन्त्र का भ्रम डाल कर लोगो को भ्रमित करता और फिर उन्ही का उपाए करने के नाम पर लाखो रुपये लूट लेता। इसी प्रकार वो तीनो दिनेश बीरेंद्र और जैन अपना अपना घर चलाते थे। तो जिन्हे इसी प्रकार की कोई विधि सीखनी है वो ऐसे ही किसी मूढ़ व्यक्ति को ढूंढ ले। एक को ढूंढने जाओगे तो 100 मिलेंगे। ऐसे व्यक्ति मेरे लेक्चर मत सुने।
और जिन्हे अभी तक ब्रम्ह्नाद के बहाने सितार बजाकर ही बहलाया फुसलाया जा सकता है वो किसी सितार बजाने वाले गुरु को ही ढूंढ ले।
जो इस बात से संतुष्ट हो सकते है कि यंहा जप तप व्रत अनुष्ठान करते रहो और फल अगले जन्म में मिलेगा ए शांति ए धर्म ए आंनद ए मृत्यु प्रयन्त ही मिलेगा वो तो किसी भी संसारी गुरु को ढूंढ ले जो बिलकुल तुम्हारे जैसा ही हो क्योकि वो ही तुम्हे ऐसे झूंठी सांत्वना दे सकता है।
क्योकि यही तो आज हो रहा है हर कोई ऐसी ही पोथी पढाये जा रहा है जिसकी परीक्षा का फल मृत्यु के बाद पर ही मिलता है। ऐसे व्यक्ति मेरे लेक्चर मत सुने।
मेरे को तो वो ही सुने जो केवल इसी बात पर विचार रखते है कि आनंद को यंही पाया जा सकता है ए मुक्त यंही हुआ जाता है ए सुखी यंही हुआ जाता है जीवन यंही जीया जाता है ए परमात्मा को यंही नंगी आँखों से देखा जा सकता है। धार्मिक यंही हुआ जा सकता है।
जिनको ये समझ आ चुका है कि यही जीवन भाव सागर है हमें इसे यंही पार करना है और इसके बाद कोई और भाव सागर मिलेगा ये तो मूर्खता की ही बात है। जो आँखे खोल कर धर्म करना चाहते है मैं तो उन्हें ही कुछ सीखा सकता हूँ। क्योकि मैं आँखे खोल कर खड़ा हूँ जागा हुआ हूँ। सोया हुआ व्यक्ति ना तो मुझे देख ही पायेगा और न ही मुझे समझ ही पायेगा।
जिन्हे वो धर्म चाहिए ए जिन्हे वो इस्थिति चाहिए जो आज से पहले बुद्धौ ने पाई ए जो एनलाइटनमेंट की अवस्था को पाना चाहते है जो स्वयं का दीपक जलाना चाहते है केवल वो ही मुझे सुने।
अंत में अगर मेरे किसी वचन से किसी के मन को ठेस लगी तो उससे क्षमा प्रार्थी हूँ।

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