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Necessities of Life :जीवन में क्या आवश्यक है ?

एक ने प्रश्न किया कि तुम कहते हो कि धर्म नहीं होता तो दुनिया सुंदर होती. सभी धर्मां के शास्त्र नहीं होते तो दुनिया सुंदर होती. मेरी बात नहीं माननी है तो मत मानों. इस धरा पर तुमने धर्म स्थल बनाये. मंदिर, मस्जिद, गिरजे, गुरुद्वारे…ये भगवान या खुदा ने नहीं (Necessities of Life )बनाये. तुम्हीं ने बनाए. तुम्हारे धर्म ग्रंथ तुमने रचे हैं. भगवान या खुदा ने नहीं रचा इन्हें….तुम्हारे ही धर्म शास्त्र हैं. तुम्हारे ही धर्म शास्त्रों में है कि जो इसे नहीं मानता उसे मार देना चाहिए. दूसरे में लिखा है कि जो मुझे मानता है वो मेरा प्रिय है. यानी जो नहीं मानता वो अप्रिय है.

खुशबू आती तो संसार महक गया होता (Necessities of Life )

बच्चा पैदा होता है. अभी कुछ दिनों पहले की घटना है. बच्चा बदला जाता है. हिंदू का बच्चा मुस्लिम के पास और मुस्लिम का हिंदू के पास. अब सोचो मुस्लिम के घर पहुंचे बच्चे का नाम मुस्लिम वाला ही रखा जाएगा. रहीम, मुहम्मद, इकबाल आदि…बच्चा तो हिंदू का था. और जो बच्चा हिंदू के घर आ गया उसका नाम रखा जाएगा…रामदास, अशोक इत्यादि…हंसी नहीं आयी क्या…तुम्हारी मूढ़ता भरी कहानी ही है ये…एक बच्चा जब हिंदू के घर पैदा होता है तो पूरा कुनबा उसे हिंदू बनाने में जुट जाता है. सबसे पहले तो नाम रखेंगे हिंदू वाला, जिससे उसके अंदर से धर्म की बू आये.

हिंदू क्यों..मुस्लिम, सिख, ईयाई सभी में से ये बू आती है…खुशबू नहीं…खुशबू आती तो संसार महक गया होता. पहले अपने धर्म के अनुसार उसका नाम रख देंगे. उसके बाद उसका संस्कार कर दिया जाता है और समझा दिया जाता है कि तुम इसके अलावा कुछ नहीं है. हिंदू समाज के लोग बच्चे को समझाते हैं किं हिंदू होना ही तेरी गति है. मुस्लमान के साथ भी ऐसा किया जाता है. उसके रीति रिवाज के अनुसार सारी क्रियाएं की जाती है.

उसे धर्म स्थल से लेकर पुस्तकें वैसी दी जाति है कि उसके दिमाग में ये बैठ जाए कि मुस्लिम होने के सिवा तेरी और कोई गति नहीं है. ऐसे ही सिख और ईसाई…ऐसे ही बौद्ध और जैन…एक जीवन जो अभी-अभी जन्मी, उसे विराट के दर्शन हो सकते थे लेकिन तुमने घेरा बंदी कर दी. उसको विराट का साक्षात्कार बहुत ही आसानी से हो सकता था. तुमने किला बंदी कर दी जाकि उसे अनुभव ही ना हो सके.

बाल विवाह के वक्त समझ नहीं होती थी

पुराने जमाने में जब बाल विवाह करवाया जाता था. उस वक्त बच्चे को क्या पता कि विवाह होता क्या है. लेकिन लड़की को समझा दिया गया कि ये तेरा पति है और लड़के को समझा दिया गया कि ये तेरी पत्नी है. यह उसके दिमाग में बैठ (Necessities of Life ) गया और जीवन भर उसके साथ ये चलता है. आज 30 साल का लड़का या लड़की स्वयं निर्धारण करता है कि मेरा पति या पत्नी कौन होना चाहिए..वैसे ही तुमने बच्चों के मन में जो धारणाएं बैठा दी हैं, हिंदू होना ही तेरा पूर्णता का लक्ष्य है.

मुसलमान होना ही तेरी पूर्णता है…वरना खुदा नाराज हो जाएगा. ऐसा करके तुमने बच्चे की सोच को संकीर्णता की सोच में बदल दिया. वह अब कभी आनंदित नहीं हो सकेगा. वो कभी नृत्य नहीं कर सकेगा. तुम हिंदुओं के मंदिर में नृत्य को देख लो. तुम उसे कहो सड‍़क पर नृत्य करे..अकेला..वो फेल हो जाएगा…क्योंकि ऐसे नृत्य सिखाया ही नहीं गया. एक बेड़ी में जकड़ा बच्चा क्या नृत्य करेगा.

आज सभी झगड़ रहे हैं..

तुम्हारे धर्मां में बेड़ियां ही तो है. यदि तुम सभी के धर्म स्थल किसी वजह से हट गये. चाहे वो युद्ध की वजह से या फिर किसी विभिषिका से…कोई ऐसा कारण आ जाए कि तुम्हारे सारे धर्म शास्त्र मिट जाए…तो सोच के देखो..वाकई दुनियां सुंदर हो जाएगी. आज सभी झगड़ रहे हैं..हिंदू श्रेष्ठ है…मुस्लिम श्रेष्ठ है… सिख श्रेष्ठ है… ईसाई श्रेष्ठ है…सोचो दुनिया में केवल एक हजार लोग बचे हैं.

क्या उस वक्त वो युद्ध करेंगे….या धर्म स्थल बनाएंगे…या कहेंगे कि हिंदू श्रेष्ठ है…मुस्लिम श्रेष्ठ है… उस वक्त वो कहेंगे कि फेंक दो इन सबको और मिल जुलकर रहो. यही तो मैं समझा रहा हूं कि हम केवल 777 करोड़ हैं. अगर मंदिर या मस्जिद के नाम पर हम मिट गये तो बहुत मुश्किल हो जाएगी. अगर गुरुद्वारे, गिरजे, बौद्ध विहार के नाम पर हम मिट गये तो बहुत मुश्किल हो जाएगी.

मूढ़ों ने डाली सारी बातें (Necessities of Life )

दोबारा डार्बिन का सिद्घांत काम नहीं करेगा. लिखकर रख ले लो, इस बात को. दोबारा बंदर से आदमी नहीं बनेगा. ये दुनिया बहुत सुंदर हो जाएगी. कोई किसी से बात करने से पहले नहीं सोचेगा कि ये कौन से धर्म का है. आज ये हर किसी के दिमाग में है. कब ये सोच तुम्हारे दिमाग में मूढ़ों ने डाल दी कि तुम्हें दूसरे धर्म वाले लोगों से फल नहीं खरीदनी…सब्जी नहीं खरीदना…राशन नहीं खरीदना…मूढ़ों ने डाली.

मैं क्लियर शब्दों में बोल रहा हूं. उन्हें ईश्वर या खुदा का कोई अनुभव नहीं है. बस वे धर्म नेता बने हुए हैं. वो अपनी-अपनी दुकान चला रहे हैं. अपनी अपनी राजनीति चला रहे हैं. आज से 30-40 साल पहले एक धर्म के लोग मानते थे कि हमारे धर्म को मानने वाले ही धार्मिक हैं बाकी का कत्ल कर देना चाहिए. आज दूसरे कौम के लोग भी यही सोचते हैं कि हमारे धर्म को मानने वाला धार्मिक हैं बाकि को यहां से निकाल देना चाहिए. दोनों में फर्क क्या रहा गया.

परमात्मा…खुदा…प्रेम का स्वरूप है

तुम सोचते हो कि इस सोच के साथ तुम सुखी हो जाओगे. आनंदित हो जाओगे. जिसकी सोच है सचिदानंद…यानी सम…चित…आनंद…क्या इस सोच के साथ तुम्हारा आनंद घटित होगा. तुम्हारे अंदर आनंद बरस रहा है क्या…इस सोच के साथ…नहीं ये हो ही नहीं सकता. परमात्मा…खुदा…प्रेम का स्वरूप है. वो परमात्मा वो खुदा वो गॉड कोई व्यक्ति बनकर (Necessities of Life )नहीं बैठा है. जिस दिन तुम्हारे अंदर से प्रेम का झरना फूटेगा तो पता चलेगा कि ईश्वर है कौन ? परमात्मा है कौन? जीवन है क्या ? अभी तो द्वेष ही द्वेष हैं. एक कौम चाहती है कि किसा तरह दूसरे कौम को मिटा दिया जाए. दूसरी कौम चाहती है कि कैसे पहली कौम को मिटा दिया जाए. मैं केवल ये दो कौम की बात नहीं कर रहा बल्कि सभी कौम यही चाहते हैं.

तीन सौ से ज्यादा धर्म दुनिया में मिलेंगे. 3600 से ज्यादा उपधर्म

हैं….संप्रदाय…विचारधारा…दुनिया में मिलेंगी. सभी यही चाह रहे हैं. मैं एक बार फिर कह रहा हूं कि यदि दुनिया से मंदिर, मस्जिद ,गिरजे, गुरुद्वारे, बौद्ध विहार, जैन मंदिर सारे धर्म शास्त्र सारे धर्म गुरु…अगर ये मिट जाए तो यही दुनिया स्वर्ग बन जाए…जिसकी कल्पना तुम करते रहते होना…स्वर्ग ऐसा होगा और जन्नत ऐसी होगी…

आज केवल इतना ही…शेष किसी और दिन…अंत में चारों तरफ बिखरे फैले परमात्मा को मेरा नमन…तुम सभी जागो…जागते रहो…

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