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Sawan 2022: शिव लिंग नहीं, तुम्हारा देह ही तुम्हें सुख की ओर लेकर जाएगा

Sawan 2022: सावन का महीना कुछ दिनों के बाद प्रवेश कर जाएगा और भारत के लोग भगवान शिव की पूजा में लीन हो जाएंगे. लेकिन क्या आप जानते हैं परमात्मा इस बारे में क्या विचार रखते हैं. नहीं…तो आइए हम परमात्मा के शब्दों में जानते हैं पूजा का अर्थ…एक ने पूछा हमने भारत में जन्म लिया और भारत देव भूमि है. साथ ही पूछता है कि क्या हम भाग्यशाली हैं. क्या वाकई हम पुराने जन्मों के पुण्यआत्मा हैं. जो भारत जैसे देश में हमारा जन्म हुआ.

सावन मास (Sawan 2022)में पूजा करने से पहले सोचो

सावन मास में पूजा (sawan purnima 2022) करने से पहले कुछ सवाल करो खुद से….तुम क्या सोचते हो खुद के बारे में ? यदि तुम ही पुण्यआत्मा हो…मैं तो कहता हूं हो…क्योंकि तुम्हें इतनी सुंदर शरीर की प्राप्ति हुई है. इतना सुंदर जीवन मिला. लेकिन यदि तुम ही पुण्यआत्मा हो तो तुम्हारे जीवन की निंदा तुम्हारे धर्म शास्त्रों में क्यों की गयी. तुम्हारे ही धर्म शस्त्रों के वचन हैं कि तुम्हें ये जीवन दुख भोगने के लिए दिया गया है. दुखालयम अशाश्वतम….पापोहम पाप कर्माहम….ये वचन तो तुम्हारे ही हैं. लेकिन मैं कहता हूं कि तुम्हें बहुत सुख की अनुभूति कराने के लिए यह देह मिली है. और इस शरीर का मतलब केवल मनुष्य के शरीर से ही मत समझ लेना. तुम्हें क्या लगता है तुम्हें सुखी करने के लिए ये देह मिला है. तो क्या कोयल को, कौवे को, कुत्ते को दुखी करने के लिए देह मिली है. नहीं इस देह का मिलना ही सुख के लिए हुआ है.

सावन में मंदिर का त्याग करके एक दिन इस काम को करें

यदि तुम देखोगे तो इस संसार में मनुष्य के अलावा पूरी सृष्टी आनंदित है…नृत्य में है. आनंदित है. कभी सावन के महीने (sawan 2022) में एक दिन मंदिर का त्याग करके अपने पड़ोस में पार्क में जाना और वहां देखना…सुबह कबूतर दाना चुग रहे होंगे. वहां कौवे भी होंगे. तोते भी आपको नजर आएंगे. हो सकता है किसी पक्षी का कोई पैर भी टूट गया हो. कहीं धागे में उलझकर या किसी चोट से..लेकिन देखना क्या उनमें से कोई दुखी दिखता है. वो कौवा…वो कबूतर…वो तोता…मोर…कुत्ता…इसके बाद घर आना और दर्पण में अपना चेहरा देखना. क्या तुम उदास हो या आनंदित हो. यदि आनंदित हो तो कितना…उनके जैसा या उससे बहुत ज्यादा. तुम कहते हो देव भूमि में जन्में…क्या इसका लाभ ? क्या देव भूमि ? हर देश के धर्मगुरू अपने यहां जन्म लेने वाले लोगों को…अपने धर्म में जन्में लोगों को यही आश्वासन देते हैं. और तुम्हें कोई आश्वासन दे कि तुम देवता स्वरूप हो. पुराने जन्मों में पुण्य थे तुम्हारे…तो तुम उसी के तो पैर छुओगे. क्योंकि उसने तुम्हारे अहंकार को और बढ़ा दिया है.

सावन (sawan 2022) में कोई नाग की पूजा करता है तो कोई पेड़ की

भारत देवभूमि है. कैसी देवभूमि है तुम भी सुन लो. भारत श्रद्धा, आस्था और विश्वास का महासागर है. सभी लोग श्रद्धा रखते हैं. कुछ हिंदू धर्म पर तो कुछ मुसलमान, कुछ सिख, कुछ ईसाई, कुछ बौद्ध, कुछ जैन…और देवभूमि…क्योंकि कहानियां तो तुमने पहले ही पढ़ी हैं. राम का जन्म, कृष्ण का जन्म, बुद्ध का जन्म, महावीर का जन्म, नानक का जन्म…सारे देवी-देवताओं का जन्म..अपने-अपने धर्मानुसार तुमने कहानियां पढ़ी हुई है और यूं कहें कि गढ़ी हुई है. पेड़, पौधे, पत्थर…इन सबमें भारतवासी अटूट विश्वास रखते हैं. कहीं पेड़ की पूजा की जा रही है तो कहीं पत्थर की. कहीं पशुओं की पूजा लोग कर रहे हैं. कोई नाग की, कोई शेर की, कोई हिरण की पूजा कर रहा है. कुछ तो ऐसे भी हैं जो अपने घर में मरे हुए पितरों की पूजा कर रहे हैं. पूर्ण श्रद्धा है. पूर्ण विश्वास है. नतमस्तक…लंबे लेटकर दंडवत…तो भारत श्रद्धा, विश्वास और आस्था का गढ़ है. यहां पेड़-पौधे, पत्थर में अटूट श्रद्धा रखी जाती है. बस एक छोटी सी कमी है. वो नजरअंदाज की जा सकती है. भारत का व्यक्ति इंसान को इंसान नहीं समझता है. पत्थर को भगवान समझता है. पेड़ों के लिए जान जोखिम में डाली जा सकती है. पशुओं के लिए दूसरे धर्मवालों की हत्या की जा सकती है. गारे मिट्टी के मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे, गिरजे के लिए किसी का भी सिर कलम किया जा सकता है. बस इंसान को इंसान नहीं समझा जा सकता है. तो छोटी सी कमी है. इग्नोर किया जा सकता है.

हर सुख है तुम्हें यहां लेकिन तुम दुखी हो

मानते रहो कि तुम देवभूमि में जन्में हो. तुम्हारे पुण्य उत्तम होंगे. मानने में कोई फर्क नहीं पड़ता है. कौन रोकने-टोकने वाला है. हमारे संविधान में पहले ही लिखा है. हर व्यक्ति को अपनी निजी आस्था रखने का पूर्ण अधिकार है. वो तुम भी रख रहे हो. काश तुम्हारे जीवन में कोई एक दिन ऐसा आये जिस दिन तुम्हारी आंख खुले. जिस दिन तुम्हें उसका दीदार सामने प्रकट हो. जिस दिन तुम एक क्षण के लिए पागल हो जाओ. उस दिन तुम्हें पता चलेगा जीवन क्या है ? उस दिन तुम्हें पता चलेगा देवभूमि क्या है ? तुम्हारी देह ही देवभूमि है. तुम्हारे भीतर है जिसको तुम मंदिर, मस्जिद,गिरजा, गुरुद्वारे कहते हो. लेकिन आकृति बनायी हुई है. अब तुम पीछे पड़ जाओगे कि इतना बड़ा मंदिर…चोटी कहां होगी. गर्भगृह कहां होगा. भीतर…अंदर..मंदिर का अर्थ होता है पवित्रता…जहां परमात्मा विराजमान हो सके. बस और इस मनुष्य धेय से उत्तम…कौन सी देह होगी. हर सुख है तुम्हें यहां लेकिन तुम दुखी हो. क्योंकि तुम्हें जीना नहीं आया है. क्योंकि तुम्हें समझ ही नहीं आया कि तुम्हारे हाथ में क्या आ गया.

बंधन क्या था ? इस बात को जानो

बंदर को कोहीनूर दे दो…वो क्या करेगा उससे..केवल उलटा-पलटा करेगा और कुछ देर बाद फेंक देगा. वही जीवन कोहीनूर तुम्हें मिल गया. तुम अस्सी वर्ष इसे उलटा-पलटा करते हो. बाद में छिन जाता है तुमसे ये जीवन…इससे सुंदर जीवन तुम्हें मिल नहीं सकता है. कोई और देवलोक, ब्रह्मलोक, बैकुंठ, स्वर्ग, जन्नत, गोलोक कुछ नहीं है. जिसकी तुम उम्मीद लगाकर बैठ गये हो. तुम सोच रहे हो कि भविष्य में ऐसा कोई अवसर आएगा…नहीं…यह अवसर है. तुम जिंदा हो…इससे बढ़िया कौन सा अवसर होगा…कौन सा उत्सव होगा. लेकिन तुम सभी हिंदू,मुसलमान, सिख, ईसाई ,बौद्ध, जैन इन पिंजरों में रहने के आदी हो गये हो. बस इसी को तुम तोड़ना नहीं चाहते हो. इससे तुम उड़ना नहीं चाहते हो. जिस दिन बातें तुम मुक्ति की करते हो…जिस दिन मेरी बातें समझ में आ जाएंगी. जिस दिन तुम इन पिंजरों को छोड़कर उड‍़ने लगोगे. उस दिन तुम्हें पता चलेगा मुक्ति क्या होती है. बंधन क्या था. तुम्हारे घर के आसपास जेल होगी…जेल के गेट के बाहर खड़े होकर कभी तुम्हें मुक्ति का अनुभव हुआ ? कभी भी नहीं हुआ होगा. रोज उसके सामने से निकलकर घर जाते होगे. लेकिन देखना कभी दस-बीस वर्ष जेल में रहता हुआ कैदी…तुम्हारे सामने उसी जगह खड़ा हो जहां से तुम निकलते हो…उसके चेहरे पर मुक्ति की प्रसन्नता देखना. हाथ उठाकर परमात्मा से कहेगा धन्यवाद तेरा..मुक्त हुआ. लेकिन वह अनुभव कब होगा. जब तुम्हें बंधन का अनुभव होगा. जब बंधन का अनुभव हो चुका होगा तो मुक्ति का अनुभव भी जरूर होगा. लेकिन सोये-सोये ना बंधन ना मुक्ति…पत्थर के लिए क्या बंधन और क्या मुक्ति…तो देवभूमि तुम्हारी देह है. सबसे बड़ा पुण्य है कि तुम्हें देह मिला.

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