ज्ञान पुस्तकों से कभी भी नहीं समझा जा सकता

ज्ञान पुस्तकों से कभी भी नहीं समझा जा सकता

ज्ञान पुस्तकों से कभी भी नहीं समझा जा सकता

ज्ञान पुस्तकों से कभी भी नहीं समझा जा सकता- ज्ञान कोई भी बाहर से तुम्हे नहीं समझा सकता- ज्ञान भीतर से ही पाया जा सकता है वो भी अपने भीतर की माटी खोदकर। कोई दूसरा तुम्हारे भीतर की माटी खोद देगा और तुम्हारे भीतर ज्ञान भर देगा ऐसा सोचना ही मूर्खता पूर्ण है।