धर्म पुरुषत्व में समाया है

धर्म पुरुषत्व में समाया है

धर्म पुरुषत्व में समाया है

धार्मिक होने के लिए तुम्हे उठ खड़ा होना होगा, क्योकि धर्म पुरुषत्व में समाया है, भीरु संसार में कुछ भी नहीं पा सकते तो फिर धर्म जैसी मूल्यवान वस्तु कैसे पा सकते है।