क्या तुम भी धर्म भीरु हो?

क्या तुम भी धर्म भीरु हो?

क्या तुम भी धर्म भीरु हो?

आज वो समय आ गया है कि आप पुनः स्वयं पर दृष्टि दौड़ाये और सोचे अपने बारे में कि क्या अभी भी आपको धर्म भीरु बन कर ही रहना है, समाज की रूढ़ि वादी विचारधाराओ को ही ढोना है, या उठ खड़े होकर सत्य धर्म की नीव पर एक इमारत अपनी भी बनानी है। अगर आप आज भी नहीं जाग पाए तो न जाने फिर ये अवसर कब और कितने जन्मो के बाद मिले। कितने जन्मो के बाद इसलिए कहां है कि ये बात तो बिलकुल ही सत्य है कि तुम पुनः पुनः आओगे और मनुष्य बन कर ही आओगे अगर तुम्हारे भीतर जरा सी भी प्यास है उसकी - तो तुम जरूर ही आओगे। फिर कोई बुद्ध मिले ये न मिले। इसलिए आज ही धार्मिक हो जाओ, आज ही जाग जाओ।