सोचो आसक्ति कितनी गहरे में बैठी है।

सोचो आसक्ति कितनी गहरे में बैठी है।

सोचो आसक्ति कितनी गहरे में बैठी है।

मुक्ति की बातें करते हो! किस किस से मुक्त होंगे तुम? आसक्ति इतनी गहरी बैठी है कि तुम उसे खोज ही नहीं पाते। कहां है जिसे तुम ढूंढ कर बाहर निकलोगे? देखो तुम अपने आप को तुम अगर महँगी से महँगी गाड़िया भी खरीदते हो तो उस लाखो करोडो की गाड़ी लेने से पहले पूछ लेते हो की पेट्रोल की एवरेज कितनी होगी। सोचो आसक्ति कितनी गहरे में बैठी है।