जिन्दा तुम्हारी आँखों में खटकता है।

जिन्दा तुम्हारी आँखों में खटकता है।

जिन्दा तुम्हारी आँखों में खटकता है।

तुम किसी को सुनते ही कहां हो! हाँ मरने के बाद तुम उसी की मंदिर बना कर पूजा कर लेते हो। जिन्दा तुम्हारी आँखों में खटकता है। चाहे बुद्ध महावीर हो, जीजस मोहम्मद हो, सुकरात हो कबीर हो नानक हो। कोई भी जीता जागता तुम्हे पसंद कहां आता है। हाँ उसके मरने के बाद उसके नाम पर दुकान चलाना तुम्हे खूब भाता है।