अच्छे विचार केवल धर्म भीरु जैसी कमजोर नीव पर नहीं टिकते।

अच्छे विचार केवल धर्म भीरु जैसी कमजोर नीव पर नहीं टिकते।

अच्छे विचार केवल धर्म भीरु जैसी कमजोर नीव पर नहीं टिकते।

अगर मनुष्य के अच्छे विचार केवल धर्म भीरु जैसी कमजोर नीव पर ही टिके हो तो अच्छे विचारो का महल जल्द ही ताश के पतों की तरहे ढे जायेगा।