पुस्तकों का धर्म।

पुस्तकों का धर्म।

पुस्तकों का धर्म।

जो केवल पुस्तकों को धर्म के लिए पड़ता है वो उस मजदूर की भांति है जो दिन रात चीनी की बोरियो को तो पीठ पर ढोता है लकिन उसने कभी भी चीनी की मिठास को नहीं जाना।