सभी नदिया सागर में मिल जाती है।

सभी नदिया सागर में मिल जाती है।

सभी नदिया सागर में मिल जाती है।

जिस प्रकार छोटी बड़ी सभी नदिया नाले जो भिन्न भिन्न स्थानों से आते है और अंत में जाकर एक ही सागर में मिल जाते है उसी प्रकार अंत तुम्हारा सभी का एक ही है और वो है उस परमात्मा का हो जाना उस आल्हा का हो जाना उस गोड का हो जाना।