शंका

शंका

शंका यही वो बीज है जो तुम्हारे महात्मा तुम्हारे बच्चों के मन में डालते है। 

धर्म जंगलो में भागने से नहीं मिलता तुम्हारा महात्मा तुम्हे हमेशा से ही गुमराह करता आया है

तुमने देखा आज तुम्हारे घर क्यों टूट रहे है इसमें सबसे ज्यादा हाथ तुम्हारे धर्म गुरुओ का है।

में ऐसे कई परिवारों को जानता हू जिनके बच्चे किसी किसी आश्रम में सेवा करने के नाम पर घर छोड़ कर चले गए इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता है कि वो किस आश्रम में गए चाहे वो कृष्ण कीर्तन करने वाले हो, या भजन गाने वाले, चाहे ब्रम्हा कुमार हो या कोई सदगुरु बनकर आश्रम चला रहा हो, कोई राधा का स्वामी हो या कोई कृष्ण का दास, कोई ज्योतिष की गड़ना करने वाला हो या कोई मूड साधक परिवार चला रहा हो।

इन सबका काम ही एक है कि बच्चों को बर्गलाओ और उन्हें समझाओ कि तुम अपने माँ- बाप की तरह अपना जीवन व्यर्थ करो तुम पढ़े लिखे हो तुम भगवान की सेवा करो कृष्ण की पुस्तके बेचो लोगो को धर्म के बारे में समझाओ

ओर बड़े मजे की बात तो ये है कि इन सबको भी धर्म के बारे में कुछ भी पता नहीं है सबको केवल इतना ही पता है की हिन्दू होना धार्मिक है या मुस्लिम होना धर्म है, इन सबने धर्म के नाम पर अपनी - अपनी दुकान खोली हुई है और इस दुकान पर काम करने के लिए इन्हे कुछ लोगो की आवश्यकता होती है जो ये सब लोग नई पीढ़ी के बच्चो को अपना शिकार बनाते है। बच्चे भोले भाले होते ही जो इनकी बातो में जल्दी ही जाते है, और माँ बाप भी धर्म के नाम पर डरे हुए ही होते है जो तो इनको कुछ कह पाते है और ही अपने बच्चो को समझा पाते है,

ये किस तरह बच्चो का ब्रेन वाश करते है ये तुम खुद जाकर मंदिरो में आश्रमों में इनके तथाकथित स्थानों में देख सकते हो।

तुम्हे यहाँ कुछ उदहारण देकर समझा रहे है जिससे तुम्हे ज्ञात होगा कि ये कैसे तुम्हारे बच्चो का फसाते है।

ये तुम्हरे बच्चो के मन में स्वर्ग के मुक्ति के मोक्ष के सिद्धि और साधना के नाम पर सपने दिखाते है उन्हें भ्रमित कर चमत्कार दिखाते है और अपने जाल में फसा लेते है। ये शंका कैसे पैदा करते है, ये में तुम्हे बताता हू।

ये उनके दिमाग में शंका पैदा करते है  उनके अपने माँ बाप के प्रति

 

यहाँ कुछ उदहारण देखिये।

शंका कैसे पैदा होती है

एक सहेली ने दूसरी सहेली से पूछा:-  बच्चा पैदा होने की खुशी में तुम्हारे पति ने तुम्हें क्या तोहफा दिया ?

सहेली ने कहा - कुछ भी नहीं!

उसने सवाल करते हुए पूछा कि क्या ये अच्छी बात है ?

क्या उस की नज़र में तुम्हारी कोई कीमत नहीं ?

लफ्ज़ों का ये ज़हरीला बम गिरा कर वह सहेली दूसरी सहेली को अपनी फिक्र में छोड़कर चलती बनी।।

थोड़ी देर बाद शाम के वक्त उसका पति घर आया और पत्नी का मुंह लटका हुआ पाया।।

फिर दोनों में झगड़ा हुआ।।

एक दूसरे को लानतें भेजी।।

मारपीट हुई, और आखिर पति पत्नी में तलाक हो गया।।

जानते हैं प्रॉब्लम की शुरुआत कहां से हुई ? उस फिजूल जुमले से जो उसका हालचाल जानने आई सहेली ने कहा था।।

उसने शंका का बीज बो दिया।

 

दिनेशानंद ने अपने जिगरी दोस्त जैन से पूछा:- तुम कहां काम करते हो?

जैन- फला दुकान में।।

दिनेशानंद- कितनी तनख्वाह देता है मालिक?

जैन-18 हजार।।

दिनेशानंद-18000 रुपये बस, तुम्हारी जिंदगी कैसे कटती है इतने पैसों में ?

जैन- (गहरी सांस खींचते हुए)- बस यार क्या बताऊं।।

मीटिंग खत्म हुई, कुछ दिनों के बाद जैन अब अपने काम से बेरूखा हो गया।। और तनख्वाह बढ़ाने की डिमांड कर दी।। जिसे मालिक ने रद्द कर दिया।। जैन ने जॉब छोड़ दी और बेरोजगार हो गया।। पहले उसके पास काम था अब काम नहीं रहा।।

 

 

 

 

एक साहब ने एक शख्स से कहा जो अपने बेटे से अलग रहता था।। तुम्हारा बेटा तुमसे बहुत कम मिलने आता है।। क्या उसे तुमसे मोहब्बत नहीं रही?

बाप ने कहा बेटा ज्यादा व्यस्त रहता है, उसका काम का शेड्यूल बहुत सख्त है।। उसके बीवी बच्चे हैं, उसे बहुत कम वक्त मिलता है।।

पहला आदमी बोला- वाह!! यह क्या बात हुई, तुमने उसे पाला-पोसा उसकी हर ख्वाहिश पूरी की, अब उसको बुढ़ापे में व्यस्तता की वजह से मिलने का वक्त नहीं मिलता है।। तो यह ना मिलने का बहाना है।।

इस बातचीत के बाद बाप के दिल में बेटे के प्रति शंका पैदा हो गई।। बेटा जब भी मिलने आता वो ये ही सोचता रहता कि उसके पास सबके लिए वक्त है सिवाय मेरे।।

 

 

बस इसी प्रकार की बाते तुम्हारे महात्मा तुम्हारे बच्चो के मन में डाल देते है और तुम्हारा घर ख़राब कर देते है, बुद्ध के भिक्षु कैसे थे क्या बुद्ध ने कभी बच्चों का बहलाया फुसलाया नहीं।

 

दिनेशानंद कभी कभी मूड में होता था तो निखिलेशंनद की बाते बता दिया करता था कि वो किस तरह लोगो को अपने जाल में फसा कर रूपए लूट लेता था और किस तरह वो बच्चों को अपना शिष्य बना लिया करता था।

 

और ये मत समझना खाली एक ही दिनेशानंद या निखिलेशंनद है यहाँ तो हर गली में कोई कोई ठग बैठा मिल जायेगा

जिसको धर्म के नाम पर ठग क्रिया आती है।

तुम स्वयं भी ध्यान रखो और अपने अपने बच्चो को भी ये पढ़ाओ और उन्हें समझाओ कि धर्म स्वयं को जानना है की हिन्दू मुस्लिम होना