ज्ञान

ज्ञान

ज्ञान भी मारता हैं

परमात्मा ने इतनी सूंदर सृष्टि बनाई, नदिया बनाई,पेड़ पौधे बनाये,पक्षी बनाये ,तुमहारे लिए पुरे परिवार की व्यवस्ता हुई तुम्हे सुखी करने के लिए ! अगर तुम्हे दुखी ही करना होता तो परमात्मा तुम्हे मुर्ख बनाता!

लेकिन तुमहारे धर्मगुरुओ ने तुम्हे इसके विपरीत शिक्षा दी तुम बंधन में हो तुम नर्क वासी हो

क्या गंगा में डुपकी लगाने से तुम्हारे सारे पाप धूल जायेंगे ?

गीता,क़ुरान,बाईबल पढ़ने से कोई ज्ञानी नहीं बन जाता अगर इन्ही धर्मग्रंथो को जीवन में उतारो तो देखना क्रांति घटेगी।

ध्यान दो धर्म हमेशा व्यक्तिगत होता है धर्म कभी भी किताबो से नहीं आता अगर पुस्तकों से धर्म आता तो जिन महापुरुषों के मै नाम लेता हूँ बुद्ध,मोहम्मद,नानक,जीसस को पुस्तकों से मिलता इन सबको धर्म अपने जीवन से मिला सिर्फ बोध का जागरण होना ही तुम्हरे लिए धार्मिक होना हैं !

 

तुम अपने पुराने ज्ञान को छोड़ दो वो तुमहारे किसी काम नहीं आएगा वो ज्ञान नहीं अज्ञान हैं तुमने पढ़ा होगा उपनिषेदो में

अज्ञानी तो फसता ही हैं ज्ञानी भी फसता हैं

अज्ञान तो मारता ही हैं ज्ञान उससे ज़्यदा मारता हैं

तुमने देखा होगा हमेशा तैराक ही डूबता हैं क्योकि उसे लगता हे में तो तेर सकता हूँ इसी तैरने के अहंकार में वो गहरे से गहरा उतरता जाता हे

और ऊपर नहीं पाता हैं

 वैसे ही ज्ञान और ज्ञानी उसी अहंकार में डूब जाता हैं इसका मतलब ये नहीं हैं के ज्ञानी होना गलत हैं ज्ञान का अहंकार होना गलत हैं

तुम्हे बस इतना करना हैं की घर बैठो मुझे सुनो ध्यान करो और परमतमा ने जो जीवन दिया हैं उसका आनंद लो