धरम एक ही है

धरम एक ही है

हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई धरम नहीं घेरे है। धरम को जानना है तो घेरो से बाहर निकलो।

धरम एक ही है

आज समाज में धरम के नाम पर हर कोई भेद भाव रखता है और ये भेद भाव तुम्हे सिखाते है तुम्हारे तथाकथित धरम गुरु।

यहाँ तुम्हे एक दृष्टान्त समझाते है की तुम्हे धरम अलग अलग क्यों दृष्टिगोचर होते है।

धरम  यानि प्रकाश , प्रकाश यानि दीपक, तुम दीपक के साथ चिपके हुए खड़े हो इसी कारन तुमह दीपक का प्रकाश नज़र नहीं आता तुम्हे दीपक का तला ही नज़र आता है।  अब हर आदमी ये ही कहता नज़र आता ही कि मेरा दीपक ही ठीक है।

तुम सभी हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई सभी को अपने अपने दीपक का तल सही लगता है,

तुम्हे दीपक कि लौ नज़र नहीं आती, इसलिए ही हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई या यु कहे कि बुद्ध महावीर मोहम्मद जीसस नानक के अनुयायी लाभ एक दूसरे से भेद करते है,

जिस दिन तुम्हे वो दीपक की लौ दिख जाएगी उस दिन सरे भेद गिर जायेगे जिस दिन तुम्हे प्रकाश दिखेगा उस दिन केवल प्रकाश ही प्रकाश दिखेगा दीपक दिखेगा।

फिर तुम कहोगे की हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई , बुद्ध महावीर मोहम्मद जीसस नानक, सभी के ज्ञान का प्रकाश एक सामान ही है।

लेकिन वो प्रकाश तुम्हे दिखेगा कैसे? उसके लिए तुम्हे दीपक के प्रकाश से बाहर आना होगा।

मै तुम्हे कहता हु कि हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई इन घेरो से बाहर आओ। ये दीपक के घेरे है, घेरे हमेशा ही छोटे होते है, समस्त विश्व ही तुम्हारा है, तुम विश्व को छोड़ कर हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई बन गए हो।

इन घेरो के भीतर रहकर तुम धरम के प्रकाश को कभी भी देख सकोगे।

दीपक के नीचे रहकर तुम्हे केवल दीपक का तला ही नजर आएगा। दीपक के प्रकाश के घेरे मै रहकर तुम प्रकाश को देख सकोगे। सोचो अगर दिन ही दिन हो और रात हो तो तुम कैसे कहोगे कि अब दिन है।

दिन कि पहचान के लिए दिन का खो जाना जरुरी है, धरम को जानने के लिए धर्म से ऊपर उड़ना जरुरी है।

भीतर रहकर तो भेद ही दिखेगा। भेद गिराना है तो इन हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई के घेरो से बाहर निकलो।

जागते रहो।

परमात्मा